नीरज चोपड़ा

भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता (जन्म 1997)

नीरज चोपड़ा (जन्म 24 दिसंबर 1997) एक भारतीय ट्रैक और फील्ड एथलीट हैं, जो भाला फेंक स्पर्धा में प्रतिस्पर्धा करते हैं। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक 2020 में 87.58 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा और एथलेटिक्स में ओलंपिक स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बने।[१]

नीरज चोपड़ा
नीरज चोपड़ा
जन्म 24 दिसंबर 1997

खांद्रा, पानीपत, हरियाणा, भारत

पेशा एथलीट (भाला फेंक)
खेल ट्रैक और फील्ड
इवेंट भाला फेंक (Javelin Throw)
कोच उवे होन
सेवा भारतीय सेना (सूबेदार)

प्रारंभिक जीवन

नीरज चोपड़ा का जन्म हरियाणा के पानीपत जिले के खांद्रा गाँव में एक किसान परिवार में हुआ। उनके पिता सतीश कुमार किसान हैं और उनकी माता सरोज देवी गृहिणी हैं।

बचपन में ही उनकी रुचि भाला फेंक में विकसित हो गई थी। उन्होंने पानीपत स्टेडियम में अभ्यास करते हुए इस खेल में रुचि ली।[२]

शिक्षा

नीरज चोपड़ा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हरियाणा से पूरी की। इसके बाद उन्होंने स्नातक स्तर तक की पढ़ाई पूरी की और बीबीए की डिग्री प्राप्त की।

करियर

प्रारंभिक सफलता

2016 में पोलैंड में आयोजित IAAF U20 विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता और विश्व जूनियर रिकॉर्ड बनाया।[३]

अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियाँ

नीरज चोपड़ा की प्रमुख उपलब्धियाँ:

  • 2018 राष्ट्रमंडल खेल – स्वर्ण पदक (86.47 मीटर)
  • 2017 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप – स्वर्ण पदक
  • 2020 टोक्यो ओलंपिक – स्वर्ण पदक (87.58 मीटर)
  • 2022 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप – रजत पदक
  • 2023 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप – स्वर्ण पदक

रिकॉर्ड

2022 में पावो नुरमी गेम्स (फिनलैंड) में उन्होंने 89.30 मीटर का थ्रो कर अपना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा।[४]

अन्य उपलब्धियाँ

  • डायमंड लीग फाइनल 2022 – स्वर्ण पदक
  • एशियाई खेल – लगातार स्वर्ण पदक

पुरस्कार और सम्मान

नीरज चोपड़ा को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं:

  • पद्मश्री (2022)
  • विशिष्ट सेवा पदक (भारतीय सेना)

व्यक्तिगत जीवन

नीरज चोपड़ा भारतीय सेना में सूबेदार पद पर कार्यरत हैं। उनका जीवन एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता तक पहुँचने की प्रेरणादायक कहानी है।

प्रभाव

नीरज चोपड़ा ने भारत में एथलेटिक्स को नई पहचान दी है। उनकी सफलता ने देश में ट्रैक और फील्ड खेलों के प्रति रुचि बढ़ाई है और युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया है।